Pakeeza

कभी चाँद, कभी तारे, कभी आसमां की ख्वाइश होती हे, तेरे इश्क़ ने दूर-दराज़ों की, चाहत रखना सिखा दिया; ________________________________________ एक इश्क़ मुकम्मल होता हे, दीदार-ऐ-सनम से यहाँ, हर रोज़ बिना इज़हार हुए, एक दिल कतल होता हे, मिजाज़-ऐ-सनम से यहाँ, हर रोज़ बिना इंकार हुए; ________________________________________ राह की राहत से मंज़िल की रुस्वाई तक [...]